Jain Tirthankaras (जैन तीर्थंकर)

Bhikshu Swami

Prabhu Ye Terapanth Mahan

प्रभो ! यह तेरापंथ महान प्रभो ! यह तेरापंथ महान । मिला, मिलेगा जिससे सबको आध्यात्मिक अवदान । प्रभो! यह तेरापंथ महान ।। १. आर्हत-वाङ्मय का उद्‌गाता,  जीवन-दर्शन का व्याख्याता,  मानव संस्कृति का निर्माता ।  जिसके कण-कण में मुखरित है,  शाश्वत का संगान ।। २. अभिनव धर्म-नीति निर्णायक,  सबल संगठन-सूत्र विधायक,  श्रम सेवा समता संगायक […]

Bhikshu Swami

Vandana Lo Jhelo Bhakta Ri Bhagwan

वन्दना लो झेलो वन्दना लो झेलो, भक्तां री भगवान ! अर्चना लो झेलो, भक्तां री भगवान ! धूप-दीप चंदन नहीं है, है श्रद्धा सम्मान ।।  मन-मन्दिर रा देवता! म्हारा प्रियतम ! जीवन प्राण ! पल-पल पूजा-आरती म्है करां समर्पण प्राण ।। २. साचेला शंकर बण्या, कर धरती रो विष-पान । कळजुग में पिण राखली थे,

Bhikshu Swami

Devte Batlaao

(लय: आपणै भागां री) रचयिता : आचार्यश्री महाप्रज्ञ  देवते ! बतलाओ  देवते ! बतलाओ शासन का आधार,  भिक्षुवर ! कैसे तुम बन पाए अवतार,  रोम रोम में रम रहे हो, बनकर एकाकार ।। . १ अनुशासन ही बन रहा है, शासन का आधार । मर्यादा को सिर चढ़ाकर, बन जाता अवतार ।। २. तेला भारीमाल

Bhikshu Swami

Swami Bhikhanji Ro Nam Aathu Yam Dhyawa

(लयः म्हरि आंगणिये में……) आचार्य श्री तुलसी  स्वामी भीखणजी रो नाम स्वामी भीखणजी से नाम आठू याम ध्यावा, बाबलियै रो उपकार किंयां भूल ज्या वा।  सांवरियो म्हांरै रूं  रू रम्यो है, पल-पल छिन-छिन स्मृति  सरसावां ।। मंत्राक्षर है नाम स्वाम रो, सरल मंत्र है परमधाम रो. भिक्खू नाम री गंगोतरी में नित न्हावां ।। २.

Bhikshu Swami

Siriyari Ro Sant

भिक्षु स्तुति  (रचयिता: आचार्यश्री तुलसी) सिरियारी से संत (लय: म्हानै गंगाजी रो पाणी) तेरापंथ रो भाग्य विधाता, श्रमण संघ रो सक्षम त्राता, लाखां आंखड्ल्यां रो तारो, हार हिया रो लागे । महानै सिरियारी रो संत प्यारो प्यारो लागे ।। १. सत्य सिराणै सदा राखतो, त्यागी सारी सुविधावां, जिनवाणी पर जीवन-जामा, झोंक्या बलिहारी जावां । बणों

Bhikshu Swami

Bhikshu Hai Imarat Ro Jharno

भिक्षु है इमरत रो झरणो   (लय : धर्म की लौ जलाएं) रचयिता : साध्वी फूलकुमारीजी भिक्षु है इमरत रो झरणो ।  जनम मरण री पीर निवारण, है साचो शरणो ।। १. सुमिरण करयां कटै संकट, दुःख गल्या लारली जावै, काळी काळी राता में भी, स्वतः उजासो आवै ।  पितवाणी पूरी करली अब, और न कुछ

Bhikshu Swami

Subah Subah Uth Kar Bhikshu Bhikshu Bol Tu

भिक्षु स्तुति (रचयिता : मुनि सुमतिकुमारजी)  (लय- बादलियो आंखडल्या में) सुबह-सुबह उठकर भिक्षु-भिक्षु बोल तूं, संकट सब कट जावैला, ओ सुजना ।। विघ्न हरण ओ मंगलकारी नाम है, दुःख में आडो आवैला, ओ सुजना ।। १. सांवरिये रो सुन्दर नाम, प्राणां स्यूं भी प्यारो है, बल्लूशा रो पुत्र, माता दीपां रो दुलारो है ।  भक्तां

Bhikshu Swami

Munind Mora

मुणिन्द मोरा श्रीमज्जयाचार्य  मुणिन्द मोरा, भिक्षु ने भारीमाल, वीर गोयम-सी जोड़ी रे, स्वामी मोरा । अति भली रे, मोरा स्वाम ।। मुणिन्द मोरा, चोथा आरा नी चाल, विविध मर्यादा बांधी रे, स्वामी मोरा । निरमली रे, मोरा स्वाम 11१11 मुणिन्द मोरा, आप मांहि तथा गण में जाण, सुध संजम जाणो तो रे, स्वामी मोरा ।

Bhikshu Swami

Rat Ri Andheri Me Jo Jap Karela

– सांवरिये रो नाम.  (लय: इक परदेसी.) रात री अन्धेरी में जो जाप करैला । सांवरिये रो नाम लियां काम सरैला ।। १. साचै मन स्यूं नाम लियां, जोश घणो जागै है, डरनै रो काम कांई, बोलतां भय भागै है ।  ।।  श्रद्धा री नाव आपो आपतरैला २. सपनो साकार हुयो, सिंह बणगूंज्यो  वेरी विरोधी

Bhikshu Swami

Babe Ro Nam Bado Hai Pyaro

बाबै रो नाम बड़ो.   (लयः बन्ना ओ बागां में झूला) रचयिता : मुनि विजय  भिक्षु स्तुति  बाबै रो, नाम बड़ो है प्यारो ओ ।  म्हारी आंख्यां रो, तारो जीवन रो है उजियारो ।। १. सिंह री, ज्यूं गूंज्यो जीवन रण में ओ,  कायरता, कभी न ल्यायी मन में ओ । नहीं पायो है, पार प्रभु

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