Jain Tirthankaras (जैन तीर्थंकर)

Bhikshu Swami

Om Bhikshu Bhikshu Nit Dhyawa

भिक्षु स्तुति (लय- संयम मय जीवन हो) रचयिता -साध्वी श्री रतनश्रीजी  ॐ भिक्षु भिक्षु नित ध्यावां ॐ भिक्षु भिक्षु नित ध्यावां । भिक्षु की म्हे अलख जगाकर आनन्दित बण ज्यावां ।। १. प्रातः भिक्षु सांयः भिक्षु, चलतां फिरतां भिक्षु,  उठतां भिक्षु, सोतां भिक्षु, तन में मन में भिक्षु ।  भिक्षु-भिक्षु-भिक्षु-भिक्षु, भिक्षु रो ध्यान लगावां ।। […]

Bhikshu Swami

Bhikshu Swam Jyotirdham

भिक्षु स्वाम ज्योतिर्धाम  (लयः जय हनुमान अति बलवान) रचयिता- साध्वी कनक श्रीजी भिक्षु स्वाम, ज्योतिर्धाम पावन नाम, दीपानंदन !  म्हारै तो थांरो ही आसरो, हे सब दुःख भंजन !  म्हारै तो थांरो ही आसरो । थांरो ही आसरो, सदा सुखवास रो ।। १. बाबो है भक्त वत्सल, भगतां नै तारै,  सारै है काम सब रा,

Bhikshu Swami

Bhikshu Bhikshu Hi &. Swami Ji Tharo Sangh Nirlo

भिक्षु भिक्षु ही जबां पर (लयः दिल के अरमां ……..) रचयिता : साध्वी चाँद कुमारी जी भिक्षु भिक्षु ही जबां पर नाम है।  तेरे नाम से मिलता बड़ा आराम है ।। १. हृदय की धड़कन तुझे पुकारती,  दर्श पाने को ये पलकें निहारती ।  जिन्दगी का तूं सही विश्राम है ।। २. हर सांस में

Bhikshu Swami

Bhikshu Ki Abhivandana Hu Kar Rahe

भिक्षु की अभिवन्दना  (लय- दिल के अरमां) साध्वी -जयश्री जी भिक्षु की अभिवन्दना हम कर रहे  स्मरण से मन में खुशाली भर रहे।। १. आ गये वे विश्व की तकदीर बन ।  नाम से भव-सिन्धु सारे तर रहे ।। २. जिन्दगी भर बन शमां जलते रहे रोशनी से हर अंधेरा हर रहे ।। ३. संघ-हित

Bhikshu Swami

Om Bhikshu Jai Bhikshu

(लयः पायलिया) रचयिता : साध्वी यशोधराजी ॐ भिक्षु जय भिक्षु ॐ भिक्षु जय भिक्ष, मंत्र बड़ा ही सुखकार रे तन्मय हो जपने से, होगा निश्चित ही बेड़ा पार रे, सांवरिया हो…हो..हो.., दीपांलाल हो…हो…हो.. ।। नाम तेरा संकट मोचक, जन-मन रोचक, मंगलकारी हो…. प्रभुवर… हो ।। १. भिक्षु तू मेरा राम है, तू ही मेरा घनश्याम,

Bhikshu Swami

Bhikshu Ashtakam

भिक्षु अष्टकम् आचार्य भिक्षु के १८८ वें निर्वाणोत्सव पर सिरियारी में आचार्य श्री महाप्रज्ञ द्वारा समुच्चारित १. अकम्पः संकल्पः क्वचिदपि न केनापि चलितः , न चित्ते चांचल्यं न च विपथगामीन्द्रियगणः ।  समं सोढा गालिः क्वचन घनमुष्टेः प्रहरणं,  प्रसन्नात्मा भिक्षुर्नयनमवतारं नयतु मे ।। २. न रागो न द्वेषो घटितघटनासु प्रतिकृतः,  विरोधः सद्भावे परिणतिमुपागात् प्रतिपदम् ।  न

Bhikshu Swami

Om Bhikshu OM Japo Sada

ओम भिक्षु जपो सदा ओम भिक्षुओम भिक्षु जपो सदा, चाह फले मुक्ति मिले । है नाम मंगलकारी, विघ्न बाधाहारी, विघ्नबाधा हारी इसने लाखों नैया तारी ।। असहायों का भिक्षु नाम सहारा है-सहारा है,  घोर अमा में करता दिव्य उजारा है, उजारा है,  ओम भिक्षु पंगु को पहाड़ चढाता है,  मूक मनुज को वाणी वर मिल

Bhikshu Swami

Kelawa Ke Yogi Tere Nam Ka Sahara Hai

शूरवीरो को धरा महान राजस्थान है  भिक्षु की जन्म भूमि कंटालिया ग्राम है।  गुलामी की जंजीरों से त्रस्त सारा देश था।  शिथिल विचारों से धर्म निस्तेज था ।।  आषाढी तेरस सन्‌ तैयासी प्यारा है  दीपाजी के लाल (बल्लूशा) जन्मा कुल उजियारा  है केलवा के योगी तेरे नाम, का सहारा  है।   बचपन प्रखर प्रतिभाकी निशानी

Bhikshu Swami, Terapanth

अ भी रा शि को उदारी हो (विघ्न हरण की ढाल)Abhi Ra Shi Ko Udari Ho (Vighn Haram Ki Dhal)

 धम्म-जागरणा विघ्न-हरण  श्रीमज्जयाचार्य अ.भी.रा.शि.को. उदारी हो, धर्ममूर्ति धुन धारी हो, विघ्नहरण वृद्धिकारी हो, सुख संपति दातारी हो । भजो मुनि गुणां रा भंडारी हो ।। १. भिक्षु भारीमाल ऋषिरायजी, खेतसीजी सुखकारी हो, हेम हजारी आदि दे, सकल संत सुविचारी हो । प्रणमूं हर्ष अपारी हो ।। २. दीपगणी दीपक जिसा, जयजश करण उदारी हो,  धर्म-प्रभावक

Mahavir Swami

Mahavir Ki Vani Ko Ghar Ghar Pahuchana Hai

( लय- संसार है इक नदिया (रफ्तार) महावीर की वाणी को घर-2 पहुंचाना है।  निर्वाण महोत्सवको जो सफल बनाना है बलिदान प्रथाओं से धरती भी थर्रायी  अवतार लिया प्रभु ने ने सुख सरिता लहरायी  सिखलाई जीव दया उसको न भुलाना है  जीयो, और जीने दो सद्‌भाव रहे मन मे ! . गिनती के श्वास भरे

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