Jain Tirthankaras (जैन तीर्थंकर)

Mahavir

Vandana Mahavir Lo Abhivandana

(लय-दिल के अरमां) वंदना महावीर लो अभिवंदना,  भक्ति से पल-पल करें अर्थ्यथना ।। स्थायी ।। देव ! तुमने देन जग को दी नई,  रात में भी रोशनी सी हो गई।  जग उठी हर चेतना में स्पंदना ।।1।। शांति का संदेश पावन जब दिया,  शुद्ध कितने पापियों को है किया।  बोलती हर आतमा में साधना ।।2।। […]

Bhikshu Swami

Bhikshu Tera Nam Taran Hara

(लय- कोरा कागज था ये मन मेरा) भिक्षु तेरा नाम तारनहारा तेरे चरणों में ये जग ,सारा-2 दीप दुलारे प्यारे संघ सितारे ।  निश दिन रहते हो, साथ हमारे। बलिहारी मै जाऊ पाऊं दरश तुम्हारा भिक्षु तेरा नाम तारनहारा तेरे चरणों में ये जग ,सारा- ② बलिदानों की अमर कहानी  कष्टों में भी अलख जगाई

Bhikshu Swami

Swamiji Jhanan Jhanan Si Jhan Jhanat Si Ru Ru Lage Re

स्वामीजी । झणण, झणण, झण, झण झणाट सी रूं रुं लागे रे,  सिरियारी समाधि पर कोई सगती जागे रे ।। स्थायी ।। सुई पाग में टांगतो, बोल्यो दरजी हुसियार।  अबतो देरी बाबाजी री, म्हारो काम सो त्यार ।।1।। स्यामीजी पद्मासन पर विराज लीन्हो, काउसग मुद्रा ध्यान।  आपां रै अब कैरी देरी ? कहतां छोड्या प्राण।।2।।

Mahavir

Ghunghru Chham Chama Cham

 घुंघरू छम छमा छम छण णा ण ण बाजे रे। हिवड़े रे मंदिर में प्रभु महावीर विराजै है।। स्थायी।। कुण्डलपुर में जन्म्या भगवन, घर-घर मंगलाचार।  देव – देवियां मंगल गावै, प्रभु लियो अवतार।।१।। संयम रे मारग पर चाल्या, कष्ट सह्या अनपार।  वर्धमान स्यूं वीर बण्या प्रभु, मन में समताधार ।12।। अन्तर्यामी समदर्शी बण, पायो केवल

Bhikshu Swami

Kahe Kishnoji Chal Chal Bharimal

कहै किशनोजी चाल-चाल भारीमाल, भीखणजी थारे कांई लागे  काढे आंख्यां लाल-लाल भारीमाल ,भीखणजी थारे कांई लागे  खींच बावड़ियो झाल चाल भारीमल ,भीखणजी थारे कांई लागे अट्ठारै सै चोकै मंगल आखातीज जलम थांरोपांच बरस रो छोड़ मरी थारी मां दूजो कुण साहरो  कितो दोरो पालर मोटो करयो जीव जाणे म्हारो  तूं भावी री ढाल नाव री

Bhikshu Swami

Bhikshu Bhikshu Ghat Ghat Me

(लय-नैतिकताकी सुर सरिता में ) भिक्षु भिक्षु घट घट में-२ बाबो छिप्यो हुयो है मन की, पावनता रे पट में, भिक्षु भिक्षु घट घट में-२ मुख में भिक्षु, मन में भिक्षु, भिक्षु है आंख्यां में।  गण रे हर अंकुर पल्लव में, भिक्षु है पांख्यां में।  कठै नहीं है बाबो बोलो, घर-घर में मरघट में। जल

Bhikshu Swami

Namo Guru Devanam

णमो गुरुदेवाणं    (लयः श्रद्धा विनय…..) रचयिता : साध्वी सिद्धप्रज्ञाजी उगी सुनहली भोर, णमो गुरुदेवाणं ।  प्रमुदित है हर पोर, णमो आयरियाणं ।। १. तेरापंथ के भाग्य निराले,  एक-एक से बढकर आले । भैक्षवगण सिरमौर ।। २. आर्य भिक्षु की अभिनव शैली,  ना कोई अपना चेला चेली । अनुशासन की डोर ।। ३. धर्म-क्रांति की

Bhikshu Swami

Ghana Suhao Mata Dipaji Ra Jaya

घणा सुहावो माता घणां सुहावो माता दीपांजी रा जाया ! थांनै तो ध्यावै सारो राजस्थान हो, सारो हिन्दुस्तान हो, मानवता रा मान हो, जिन-शासन री शान हो, माता दीपांजी रा जाया ।। १. शास्त्रां री गहराई में, अति गहराई स्यूं थे उतस्या,  कांटां रै बीहड़ मारग में, निर्भयता स्यूं चरण धरया ।  हो स्वामी! कीन्हो

Bhikshu Swami

Swamiji Thari Sadhna Ri Meru Si Unchayi

(लयः मारूजी ! थांरै देश में ……) स्वामीजी ! थांरी साधना री स्वामीजी! थांरी साधना री मेरू-सी ऊंचाई । मेरू-सी ऊंचाई, है सागर-सी गहराई हो ।। १. सिंह-सपन स्यूं आया माता, दीपां रै प्रांगण में,  सिंह-वृत्ति स्यूं ही उतस्या संयम रै समरांगण में,  मरुधर रा धोरी वीर जी, चाल्या बाधावां चीर जी,  कान खड्या होग्या

Bhikshu Swami

Shree Bhikshu Swami Ro Prabal Pratap Hai

(लयः आने वाले कल की तुम ) रचयिता : युवाचार्यश्री महाश्रमणजी भिक्षु-स्मरण श्री भिक्षु स्वामी रो परम प्रताप है।  श्रद्धा-विधियुत नाम समरतां, मिटै बहुल संताप है।। १. मिलै नहीं जद अन्य सहारो, महापुरुषां नै याद करां, दुःख भय री स्थितियां में, आस्थासिक्त स्वरां स्यूं नाद करां जन-जन रोज जपै जयकारी जाप है ।। २. सत्य,

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