Shivji

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Shiv Mahima Stotram

श्रीशिवमहिम्नः स्तोत्रम् * निम्न स्तुति के रचयिता गन्धर्वराज श्रीपुष्पदन्त थे।  इनकी यह रचना पुष्पदन्त विरचित श्रीशिवमहिम्नः स्तोत्र के नाम से प्रसिद्ध हुई। ।। श्रीपुष्पदन्त उवाच ।। महिम्नः पारं ते परमविदुषो यद्यसदृशी स्तुतिर्ब्रह्मादीनामपि तदवसन्नास्त्वयि गिरः। अथावाच्यः सर्वः स्वमतिपरिणामावधि गृणन् ममाप्येष स्तोत्रे हर निरपवादः परिकरः ।। । ।। (गन्धर्वराज पुष्पदन्त भगवान् शंकर की स्तुति के उपक्रम में […]

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Dwadash Jyotirlingashatkam ,—Aadi Shankaracharya Virchit

सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम् ! भक्तप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये !! 1 !! श्रीशैलशृङ्‌गे विविधप्रसङ्‌गे शेषाद्रिश्रृङ्गेऽपि सदा वसन्तम् ! तमर्जुनं मल्लिकपूर्वमेनं नमामि संसारसमुद्रसेतुम् !! 2 !! अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम् ! अकालमृत्योः परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम् !! 3 !! कावेरिकानर्मदयोः पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय ! सदैव मान्धातृपुरे वसन्तं ओङ्‌कारमीशं शिवमेकमीडे !! 4 !! पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने

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Mahamrityunjay Mantra

महामृत्युंजय मंत्र लिरिक्स ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् || मंत्र का अर्थ हम त्रिनेत्र को पूजते हैं, जो सुगंधित हैं, हमारा पोषण करते हैं, जिस तरह फल, शाखा के बंधन से मुक्त हो जाता है, वैसे ही हम भी मृत्यु और नश्वरता से मुक्त हो जाये पूरा महा मृत्युंजय मंत्र  ॐ

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Shiv Tandav Stotram Lyrics

“जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥ जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी । विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।  धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥ धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर-स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।  कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥ जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा-कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।  मदांध

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Shiv Mahima

शिव उठत शिव-चलत शिव शाम भोर है    शिव बुद्धि शिव चित शिव मन विभोर है  शिव रात्रि ,शिव दिवस शिव स्वपन शयन है  शिव काल शिव कला शिव मास अयन है  शिव शब्द शिव अर्थ शिव ही परमार्थ है  शिव कर्म शिव भाग्य शिव ही पुरुषार्थ है  शिव स्नेह शिवराग, शिवही अनुराग है।  शिवकली शिवकुसुम

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Bhagwan Meri Naiya Us Par Laga Dena

भगवान मेरी नईया, उस पार लगा देना,  अब तक तो निभाया है, आगे भी निभा देना हम दीन दुखी निर्बल, नित नाम रहे प्रति पल  यह सोच दरस दोगे, प्रभु आज नही तो कल  जो बाग लगाया है, फूलों से सजा देना, भगवान मेरी नईया…….. तुम शांति सुधाकर हो, तुम ज्ञान दिवाकर हो  मम हँस

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