Shrawak Sambodh

Shrawak Sambodh

श्रावक-संबोध (पूर्व भाग) समर्पण 1. अणुव्रत-त्रिपथगांप्रेक्षा-प्रद्योतनात्मजाम् । जीवनविज्ञान-ब्रह्पुत्रीं तरंगिणीत्रयम् ॥ 2. स्मृत्वा स्नात्वा च विस्तार्य,बोधत्रयं वितीर्य च। अथ श्रावकसंबोधः,श्रीसंघाय समर्प्यते ॥ (युग्मम्) धर्म का काम है मनुष्य को मनुष्यता का बोधपाठ देना, अच्छा जीवन जीने की कला सिखाना। अणुव्रत मानवीय मूल्यों की न्यूनतम आचार-संहिता है। इससे जीवन पवित्र बनता है। इस दृष्टि से अणुव्रत को […]