Swagat

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Hatho Me Leke Phoolo Ka Har

(लय- आने से जिसके आये बहार -) हाथों में लेके फूलो का हार , मानस में उमड़ी खुशिया अपार  श्रीमन हम आये स्वागत के लिये 2  झूमता ये उपवन, देखो महकी है हर एक डाली -2 मिल रहे। सुमन मन, देखो छायी है खुशिया निराली है, तन पुलकित,मन पुलकित है। आशा लाये है   स्वागत […]

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Samta Ra Sagar Sant Sukhi Sansar Me

समता रा सागर संत सुखी संसार मे  निज आत्म  उजागर संत सुखी संसार मे है सतोष शान्ति रो साधन वीतराग री वाणी  म़मता मार पछार च्यार रिपू खोली सुखरी खाणी काचर बीज कर्म रो कर्ता, ओ मन सदा सतावै  संत सांकड़े भीड़ टीड री मौत मुट्ठी में आवै रे सात-२ पीढया रो सांसो घर गृहस्थ

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Sant Hai Ganga Dhar Saman

(लय- धर्म की लौ जलाए हम) संत है गंगा धार समान -2 इसमें प्रतिपल स्नान करे वह बनता सदा महान ④ जहाँ -२ बहती गंगा वहा सदा हरियाली,  संत चरण टिकते ही आजाती अद्भुत खुशहाली  सरस धरा बनती हो जाता पौरुष भी फलवान ② सहज और अपनी गति से बहती यह पावन धारा तरने वाले

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