Tapasya (तपस्या)

Bhachya, Tapsya

Koyaldi Ku Hu Kuhu Moriya Ji Bole (Chobisi)

चौबीसी  कोयलड़ी बोले कुहु — मोरिया जी बोले-2 उगते सूरज न करू वंदन महावीर जी,  म्हान भव भव सू तारो  पहला ऋषभ नाथ जिणजी ने बांदू  दूजा अजितनाथ देव ओ ,महावीर जी  म्हान, भव-२ सू तारो तीसरा संभवनाथ जिणजी ने बादूं चौथा अभिनंदन देव ओ महावीर जी म्हान, भव-२ सू तारो पाँचवा सुमति नाथ जिणजी […]

Adhyatmik, Jain Bhajan

Ki Man Ko Shant Banaye Hum

सांस सांस पर परमात्मा का ध्यान लगाये हम  किमन को शान्त बनाये हम 1 जीवन है संग्राम से जीना सीखे हम  अमृत व विष दोनो को पीना सीखे हम  लाभ अलाभ हर्ष, शोक में सम् बन जाए हम  कि मनको मन को शान्त बनाये हम  2. वर्तमान में जीने का अभ्यास बढ़ाते जाये  भूतकाल के

Tapsya Geet

Ek Chhoto So Tapsi

तपस्या एक छोटो से तपसी बिर तनम खुशी, बिर मन में खुशी  ओ बात काई रे बताऊं थान आज मै बिरा दादोसा पूछे बिरा दादीसा पूछे तपसी  काई रे खावण री थार मन में  म्हतो पिज्जा कोनी खाऊ, म्ह तो बर्गर कोनी खाऊ  अबक तपस्या करण री मन मे  बिरा पापाजी पूछे- 2 बिरा मम्मी

Tapsya Geet

Mehandi Rachan Lagi

लय – मेंहदी राचण लागी मेहंदी राचण लागी हाथा में तपसी र नाम री  आई शुभ घड़ी देखो म्हारे आंगण आजजी  बाजे बाजे रे शह‌नाई तपसी र नाम री  आई शुभ घड़ी देखो  तप करके तपसी कुलरो नाम दिपायो  अनुमोदना हो, अनुमोदना करूंतपसी थारेनाम री आई शुभ घड़ी  तपसी री देखो अदभुत है माया  देखो

Tapsya Geet

Aaj Hamare Ghar Aangane Me Dekho Khushiya Chhayi

आज हमारे घर आँगन में  (तर्जः माईनी माई मुंडेर पे) आज हमारे घर आँगन में देखो खुशिया छाई  , सौ-सौ साधुवाद  उन्ही को, तप में शक्ति जगाई  तपस्या करल्यो थे, तपस्या करल्यो थे। ① भिक्षु शासन की बगिया में, तप का फूलखिला है  बड़े भाग्य से ऐसा नन्दनवन, गण हमें मिला है , इस उपवन

Guru

Ab Saunp Diya Is Jeevan Ka Sab Bhar Tumhare Hatho Me

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में। है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में॥ मेरा निश्चय बस एक यही, एक बार तुम्हे पा जाऊं मैं। अर्पण करदूँ दुनिया भर का सब प्यार तुम्हारे हाथों में॥ जो जग में रहूँ तो ऐसे रहूँ, ज्यों जल में कमल का फूल

Mahapragya

Mahapragya Gururaj

स्तवना महाप्रज्ञ गुरुराज ।, चरणों श्रद्धा सुमन चढ़ाते हैं। हम सविनय शीष झुकाते हैं ।। पुण्यधरा टमकोर, छाई खुशियां चिहुं ओर, मां बालू हरसाई । प्रभु जन्म हुआ सुखकर, चौरड़िया कुलशेखर, दो बहनों के भाई। हो… स्वप्न हुआ साकार, सब मिल गीत खुशी के गाते हैं ।।111 वैराग्य भाव जागा, मां बालू का सागा, दीक्षा

Guru

Jyoti Charan Abhyarthana

ज्योतिचरण अभ्यर्थना चरण शरण गुरु महाश्रमण की, झंकृत मन तंत्री के तार । श्रद्धा सुमनों से आपूरित, झेलो भक्ति भरा उपहार ।। विहस उठी थी दशो दिशाएं, पाकर झूमर कुल नंदन । मंगल गीतों से अभिगुंजित, माँ नेमा का घर आंगन । मोहनगारी मूरत तेरी, बन गई जन जन प्राणाधार ।।1।। सरदारशहर की पुण्यधरा पर,

Diksha

Jain Shraman Ki Diksha Lene Vairagi Taiyar

(लय- सावन का महीना) जैन श्रमण की दीक्षा लेने वैरागी तैयार ।  संयम के जीवन पर चलना है खांडे की धार ।।  कदम-दर-कदम सावधान बन चलना हे।,  पल-३ ज्योतिर्मय दीपक बन जलना है  समयं गोयम मा पमायए मंत्र बने साकार   सरलनही है संयम  पालन करना  महानदी गंगा को बाहो में तरना  निरति चार आचार

Diksha

Sanyam Ke Path Par

(लय- जहां डाल-डाल पर सोने) संयम के के पथ पर दृढ़ कर जीवन को सफल बनाना जिनशासन की शान बढ़ाना तन मन अर्पण कर चरणन में जीवन ज्योति जगाना  जिन शासन शान बढ़ाना  आयेगें कष्ट अनेको ही पथ से ना विचलितं होना  हो ज्ञान ध्यान में लीन सदा क्षण भर भी व्यर्थ न खोना आंधी

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