Tapasya (तपस्या)

Diksha

Koi Veer Ye Path Apnaye

 (लय- मेरा रंग दे बसंती चोला) कोई वीर ये पथ अपनाए ३  भक्ति मार्ग पर वोही आता जिसके उत्तम कर्म है।  निकट भवि ही धारण करते और निभाते धर्म है  जिसके उत्तम भाव सदा ही वही संत बन पाए,  हर एक बूंद न बनता मोती, पड़ करके इस सीप में  हर परवाना जल नहीं सकता […]

Diksha

Bihad Path Par Chalana Nahi Asan Hai

(लय- खड़ी नीम के नीचे मैं तो एक ली) बीहड़ पंथ पर चलना नहीं आसान है  जलते अंगारो को कर में लेना काम महान हैं  नंगे पैरो वसुंधरा  पर बहुत कठिन ही चलना है।  पंच महाव्रत स्वर्ण शिखर को निज कंधो पर धरना हें संयम लेना जीवन का बलिदान है  चंचल मनकी चंचलता को करना

Diksha

Karalyo Karalyo Ab Aatma N Ujwal Karalyo Ho

(लय-तेजा) करल्यो करल्यो करल्यो अब आत्मा उज्वल करल्यो हो साथ मिल्यो है गुरुराज रो  देवगुरु और धर्म सहारे नैया पार लगाज्यों हो  शरणो है साचो जिन धर्म रो ……..पड़‌पोतो,  …………कुल दीप हो, कोख सवाई ….मातरी ,गुरुवर र परताप स्यु गढयो नयो इतिहास हो ,नाम लिखावो तेरापंथ  में महाश्रमण सा गुरुवर पाया साचो तेरापंथ हो,   दीक्षा

Diksha

Diksha Par Gey Muktak

दीक्षा पर गेय मुक्तक  1 संसार में माना गया र्दुलभ ये नर का तन ।  लेकिन भटकता भोग और विलास में ये मन ।। सौभाग्य से हमें मिला महा वीर का शासन  जो बोलता है आज भी ,संयम  ही है जीवन  ।। 2 दीक्षा का अर्थ है, आध्यात्मिक शरण ।  संयम का मार्ग है सचमुच

Adhyatmik, Kabir, Nirgun, Satsang, Vairagya

Satsangat Se Sukh Milta Hai

सतसंगत से सुखमिलता है  जीवन का कण-2 खिलता है। सत्संगत से सद्‌ज्ञान मिले  सत्‌संगत से भगवान मिले पानी से पौधा फलता‌ है ② सतसंगत से वैराग्य बढ़े  सतसंगत से सौभाग्य बढ़े  दीपक से दीपक  जलता है ③ नास्तिक भी आस्तिकता पाता  पापी भी पावन बन जाता  चाबी से ताला खुलता है। मानव को  जैसा संग

Guru

Mahashraman Tera Gungan Karu

महाश्रमण तेरा गुणगान करू, मनकी येआश फले  परशब्द नहीं क्या गीत लिखूं श्रद्धा  के दीप जले ① आगम के सक्षम ज्ञाता, ओ जैन जगत के सूरज अहिंसा के पद‌ चिन्हो पर शांती का सवेरा जागे  अणुव्रत प्रेक्षा घर घर पहुचे जन जन की प्यास बने  मन श्रद्धा दीप जले ② प्रभु-वीतरागता तेरी विरले संतो में

Adhyatmik, Kabir, Nirgun, Satsang, Vairagya

Maya Ke O Pujari Aage Ki Kuch Khabar Hai

माया के ओ पुजारी आगे की कुछ खबर है।  इस घर से और आगे एक दूसरा भी घर हैं। ① इतना ना जुलम करतू धरती भी काँप जाए।  वरना दुखी की आहे तेरा निशां मिटाये  अब भी जरा संभल तू डर मौत का अगर है। 2) जो पाप कर चुके हैं और अब भी कर

Mahapragya

Khushiya Aaj Manate Hai

महा प्रज्ञ A खुशिया आज मनाते है मंगल थाल संजातेहै महाप्रज्ञ प्रभु जन्मोत्सव पर बच्चे नी मिलकर गाते हैं  क्या बोले बोलो क्या बोलो H B To you ① शासन सितारे बन चमकेंगे  प्रज्ञा की खुशबू  पा  महकेंगे श्रद्धा समपर्ण का दीपक जले   तेरे कदम पर बढ़ते चले (2) चरणों में तेरे सब आते हैं

Guru, Mata Ji, Pita

Milate Soubhagy Se Mata,, Pita Aur Guru

(लय- कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं) माता पिता और गुरु  मिलते सौभाग्य से माता पिता और गुरु उनके उपकार को तुमभुलाना नही  भाव सेवाका मन में भावित रहे उनके दिल को कभी भी दुखाना  नहीं  ① जन्मदाता है वो पालन पोषण करें ज्ञान देकर  जीवन सवारे सदा  मान अभिमान वश उनका अपमान कर बूढी

Guru, Krishna Ji, Shyam

Lakho Mahafil Hai Jaha Me

लाखों महफिल जहां मे गुरु वर (  यूं तो) तेरि महफिल सी महफिल नहीं है-2  स्वर्ग सम्राट हो या हो-चाकर, तेरे दर पे है दरजा बराबर तेरी हस्ती को है जिसनेजाना कोई आलम नया फिर नहीं है दरबदर खाके ठोकर जो थककर  आगया गर कोई तेरे दर पर  तूने  नजरोसे रस जो पिलाया  वो बताने

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