यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection.
नववर्ष (थाली भर कर ल्यायी खिचडो )
छायो है आनन्द घणेरो मन मे हर्ष अपारजी
नयो साल लेकर आयो खुशियां री भरमारजी
उत्सव की खुशहाल घड़ी म था सगला रो स्वागत है
थान देण बधाई म्हारो मन अति होरहों गद गद है
दिर्घायू संग मिल आपने अन धन रो भंडार जी
(2) गया दिना री पीड़ा जासी नयो सवेरो आणो है
गाछा म अब दिख कोपिला पतझड़ निश्वय जाणो है ध्यान रहे कोई बेरण आंधी मंजर नहीं उजाड़ जी
③ सुख समृद्धि शांति मिले सब कोई प्रभुसे मांग करा प्रतिभा वान युवा युवति और वृद्धा रो सम्मान करा हिलमिल रहस्या और बांटस्या एक दूजे में प्यार जी