यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection.
तर्ज (Tune): सावन का महीना
भजन के बोल / Lyrics
गुरुवर के चरणों में है वन्दन शत- 2 वार
हाथ जोड़कर पूछे सुखसाता बारम्बार
① दशर्न हुये है आज शुभ दिन आया ।
तृप्त हुई प्यासी अंखियां मन हरसाया ।।
पावन सन्निधि में खुशियों का आर न पार
दिल्ली का महिला मंडल श्री चरणों में आया
इंगित आराधना का लक्ष्य बनाया
महिलाएं करेगी गुरु सपनों को साकार
तुलसी जन्म शताब्दी का पावन अवसर
त्याग तप की भेंट हम चढायेगें गुरूवर
हम प्रभुवर के आभारी अनहद किया उपकार-
तेरापंथ शासन पाया, हम भाग्यशाली
युग द्रष्टा , युगस्रष्टा महाश्रमण गणमाली ।
संघ समंदर में है, मणि मुक्ता अपरम्पार ||