Hansi Majak Ke Geet

यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection.

1 जबसे तेरा आया बुलावा तब से लग रही आस पतासा देदे ना देदे ना माथो भी न्हायो मैं तो चोटी बणाई, टेढी काढ़ी टाल पताशा …

साड़ी भी पेरी मं तो ब्लाउज भी पेरयो, पेर्यो पेटीकोट पताशा 
मोटर बैठर थांर घर आई घर को बाल्यो तेल पताशा दे देना दे देना 
चार पताशा की चाय बनाई, ढुल गई चुल्ह माय पताशा छोरो भी रेग्यो म्हारी छोरी भी रेगी राजीन्द रेग्यो मूंडो धोय पताशा
2 थाली में गुड़ दिसरे घणेरो, बनड़ी री दादी न देवो रे मती, र दिखावो रे मती र चखावो रे मती कुण बिलमायो म्हारो मोडीयो जती । मोडीय जती री निजर बुरी है तो आंख्या काढ़लो मोडो राती रे राती, कुण बिलमायो म्हारो मोडीयो जती, थाली में गुड दिसरे घणेरो (इस तरह बड़ीया, मा, काकी, माझी सभीका नाम लेणा) ***
3 घुम घुमालो जी गुड बांटण वाला घाघरो, देखी थारी चुनड़री मरोड़ 
म्हार सामा झाँको जी गुड़ बांटण वाला चोरटा
 आधा न थोड़ो जी आधा न बोलो क्युं दिया, राखी म्हारी भांत मं दुभात 
म्हारा सामा झाँको जी बनड़ा री दादी चोरटा 
हाथा में चुड़लो जी गुड़ बांटण वाला दांत रो, देखी थारी गजरा री मरोड़ म्हार समा झांको जी बनड़ री मायड़ चोरटा 
कोया में काजल जी गुड़ बांटण वाला घुलरयो, देखी थांरी बिंदली री मरोड़ म्हारा सामा झांकोजी बनड़ री काकी चोरटा 
पगल्यां में पायलजी गुड़ बांटण वाला बाजणी, देखी थांरी बीछीया री मरोड़ म्हार सामा झांको जी बनड़ री भाभी चोरटा
 आधा न एक डली आधा न दो डली क्यों दीनीराखी म्हारी भांत में दूंभात म्हार सामा झांको जी गुड़ बांटन वाला चोरटा***
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