यह सांस्कृतिक और परंपरागत गीत है। A cultural and traditional song.
(कर चले हुम फ़िदा जान-ओ-तन साथियों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों )- (२)
साँस थमती गई नब्ज थमती गई
फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया
कट गये सर हमारे तो कुछ गम नहीं
सर हिमालय का हमने न झुकने दिया
मरते मरते रहा बाँकापन साथियों, अब तुम्हारे …
जिंदा रहने के मौसम बहुत है
मगर जान देने की रुत रोज आती नहीं
हुस्न और इश्क़ दोनों को रुसवा करे वो जवानी जो खूं में नहाती नहीं
बाँध लो अपने सर पर कफ़न साथियों, अब तुम्हारे …
राह कुर्बानियों की न वीरान हो
तुम सजाते ही रहना नये काफ़िले
फतह का जश्न इस जश्न के बाद है
जिंदगी मौत से मिल रही है गले
आज भारती बनी है दुल्हन साथियों, अब तुम्हारे …
खींच दो अपने खूं से जमीं पर लकीर इस तरफ
आने पाये न रावण कोई तोड़ दो
हाथ अगर हाथ उठने लगे छूने पाये न सीता का दामन कोई राम भी तुम तुम्हीं लक्ष्मण साथियों, अब तुम्हारे …