स्तवना (तर्ज – तेरस री है रात….)
महाप्रज्ञ गुरुराज ।, चरणों श्रद्धा सुमन चढ़ाते हैं।
हम सविनय शीष झुकाते हैं ।।
पुण्यधरा टमकोर, छाई खुशियां चिहुं ओर, मां बालू हरसाई ।
प्रभु जन्म हुआ सुखकर, चौरड़िया कुलशेखर, दो बहनों के भाई।
हो… स्वप्न हुआ साकार, सब मिल गीत खुशी के गाते हैं ।।111
वैराग्य भाव जागा, मां बालू का सागा, दीक्षा को तैयार।
सरदारशहर पुर में, गुरु कालू चरणों में, मुस्काए बन अनगार ।
हो… सौंप दिया जीवन, संयम की नित अलख जगाते हैं ।।2।।
सौंपा गुरु कालु ने, तुलसी करकमलों में, सौभाग्य दीप जला ।
आजीवन रहे समर्पित, बन गए वसुधा में वन्दित, मानस कमल खिला ।
हो… मुनिवर का विश्वास, पाकर कल्पतरु लहराते हैं ।।3।।
तुलसी गुरु का सिर हाथ, निभाया जीवन भर साथ, तेरापथ भाग्योदय ।
गुरु शिष्य की यह जोड़ी, जिसने युगधारा मोड़ी, जिनशासन अभ्युदय।
हो … महायोगी महाभाग ! सबकी प्रज्ञा को जगाते हैं ।।4।।
बांटी तुमने रसधार, करुणा के पारावार, वत्सलता याद करें ।
अद्भुत प्रज्ञा आलोक, विस्मित है सारे लोक, आगम भंडार भरे ।
हो… वर जीवन विज्ञान, प्रेक्षाध्यान जन अपनाते हैं ।।5।।
प्रभु आपका उपकार, है जीवन का आधार, स्मृतियां सरस रही।
श्रीचरणों की शरण, दे दो गुरुवर दर्शन, अखियां तरस रही ।हो… भक्तों के हृदय, श्रद्धा से गुण गौरव गाते हैं ।।6।।
(तर्ज – तेरस री है रात….)