Ar Prabhu Stavan
18 अर प्रभु स्तवन अर जिनराज। मोनें प्यारा लागै छै जी मोनें वाल्हा लागे छै जी अर जिनराज ॥ 1. अर जिन कर्म-अरी नां हंता, जगत उधारण जहाज। मोनें वाल्हा लागे छै जी अर जिनराज ॥ 2. परीषह उपसर्ग रूप अरी हण, पाया केवल पाज। मोनें वाल्हा लागे छै जी अर जिनराज ॥ 3. नैण […]