Mahavir Prabhu Stavan 24
24 chobisi महावीर प्रभु स्तवन नहीं इसो दूसरो जगवीर, उपसर्ग सहिवा अडिग जिनवर, सुरगिरि जेम सधीर। 1. चरम जिनेन्द्र चौबीसमा रे, अघ हणवा महावीर। विकट तप वर ध्यान धर प्रभु, पाया भव जल तीर ॥ 2. संगम दुख दिया आकरा पिण, सुप्रसन्न निजर दयाल। जग उद्धार हुवै मो थकी रे, ए डूबै इण काल ॥ […]