म्हारी चंद्र गौरजा रत्ना Ro Khambo Dikhe Door Syu
म्हारी चंद्र गौरजा म्हारी चंद्र गौरजा रत्न रो खम्बो दिखे दूर स्यू , ओह म्हाने आव् अचम्भो सौतन र महला राजन क्यूँ गया ओ म्हारी पायल बाजे चढ़ती रा बाजे म्हारा बिछीया उड़ जाए तीतरी दिवलो नजर आवे म्हारी सौत रो, म्हारी चंद्र गौरजा। …. आधी नदिया कांकरा जी कोई आधी बालू रेत् आधी गौ […]