यह जैन तपस्या और अनुमोदना के अवसरों पर गाया जाने वाला आध्यात्मिक गीत है। A spiritual song for Jain Tapasya and Anumodana.
तन धन रो ! कांई रै गुमान करे
(तर्ज :- दिल करता)
रचयिता : साध्वी राजीमती
तन धन रो ! कांई है गुमान करै, तन धन रो,
खाली हाथां जावै, करणी रा फल पावै,
क्यूं झूठी दौड़ लगावै ।। स्थायी ।।
आज रो गरीब काल, धनी बण ज्यावै है,
करोड़पति सेठ रा भी, भाग उड़ ज्यावै है। हो…
.किण स्यूं न डरै बांनै, मौत डरावै ।।१।।
माया किणरै साथ जावै, आगै पीछे देखलै,
थारै भी न साथ जासी, मन में आ सोचलै। हो…
.सोने री लंका भी तो, राख बण ज्यावै ।।२।।
एकलो ही आयो है तूं एकलो ही जावैला,
आसमा रा चाँद तारासारा छुप जावैला। हो….
डेरा उठाऊ थांरा, कद उठ ज्यावैं ।।३।।
आज रो भरोसो नहीं, काल री कै सोचे है, भयो है खजानो भीतर, बाहर कांई खोजै है, हो….
नींद उड़ावो थांनै, “तुलसी” जगावै ।।४।।