“Osiya Bulao Ji”

ओसियां बुलाओ जी
(तर्ज : लोकगीत)
ओसियां बुलाओ जी, ओ मैय्या म्हानै ओसियां बुलाओ जी, ओसियां आस्या दर्शन पास्या, सोया भाग्य जगास्या जी ।।
जो भी थारै द्वारें आवै, खाली हाथ न जावै, म्हे भी थारै द्वारें आस्या, खाली हाथ न जास्या जी ।। 1 ।।
मैय्या जल्दी बुलावो, मत ना देर लगाओ, मैय्या म्हारी थे सुण लीज्यो, नहीं तो भूखा ही रह जास्या जी ।। 2 ।।
मैय्या थारै मेलौ, सगला मिलकर आस्या, थारै द्वार पर धोक लगास्या, लापसी नारियल चढास्या जी ।। 3 ।।
थारे द्वारै आकर, “भक्त” भजन सुनावै, जो मैय्या थांरा हुक्म हुवै तो, अगली साल भी आस्या जी ।। 4 ।।

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