Hare Hare Mandap Ki Chhav Re , (Haldi)

लय

हरे हरे मंडप की छाँवरे बन्नी फूलो सी लागे-२ ,
आई है हल्दी की शाम रे बन्नी फूलोसी लागे-२ 
 मंडप में दादी हल्दी पिसावे दादा संग गणपतिको चढ़ावे-२ ,
मंगल हो सारे काजेरे – बन्नी फूलो सी लागे
 मंडप में मम्मी हल्दी पिसावे, पापा संग शिव गौरीको चढ़ावे,
 अमर हो लाडो का सुहाग रे 
 मंडप में चाची  हल्दी पिसावे चाचा संग विष्णुलक्ष्मी को चढावे 
भरेरहे् धन धानरे-बनी फूलो सी लागे
 मंडप में भाभी हल्दी पिसावे भैया सँग राम सीताको चढ़ावे
 बने रहे संस्कार रे 
बनी फूलो सी लागे 
मंडप में बुआ हल्दी पिसावे, फूफा संग कान्हा राधा को चढ़ावे 
बना रहे प्रेम अपार रे

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top