(लय-मुझसे जुदा होकर)
आया शुभ अवसर ये, आओ करे बहुमान ।
अभिनंदन वर्षीतप का, गाएं मिलकर गुणगान।
। वंदना, तप को मेरी वंदना साधना तप है कठिन साधना
1. वर्षीतप का तप है, तपस्या का रंग चढ़े,
भाभी वर्षीतप कर, दो कुल पर कलश चढ़े
तू धार सके तो धार, तप है जीवन का सार -2
अभिनंदन है तप का गाएं मिलकर गुणगान। वंदना तप को मेरी वंदना साधना तप है कठिन साधना ।।
2. तप में वह शक्ति है तप में प्रभु भक्ति है,
कर्मों को क्षय करके मिल जाती मुक्ति है।
तप है वीरों का ताज, तप जिन शासन की शान -2 अभिनंदन वर्षीतप का, गाएं मिलकर गुणगान, वंदना तप को मेरी वंदना साधना तप है कठिन साधना।।
3. मंगल पावन अवसर, परिकर में आया है,
वर्षीतप कर भाभी ने, जीवन महकाया है,
वर्षीतप की जय-जयकार, करें तपसन का सम्मान।। अभिनंदन है वर्षीतप का, गाएं गाएं मिलकर गुणगान, वंदना तप को मेरी वंदना साधना तप है कठिन साधना ॥
4.
अभिनंदन उत्सव है, वर्षीतप गुण गाये
तप का अनुमोदन कर, मन सबके हर्षायें
साधना वर्षीतप, और गुरुवर को ध्यान।।
अभिनंदन वर्षीतप का, गाएं मिलकर गुणगान, वंदना तप को मेरी वंदना साधना तप है कठिन साधना ।।