(लय- तेजा)
करल्यो-करल्यो अठायां अब मास खमण थे करल्यो हो। तप ही जीवन रो साचो सार हो । स्थायी ॥
मन रो मैल उतर तन हो ज्या, सागीड़ो नीरोग हो। साचो गंगाजल तप है आपणै ।। 1 ।।
हाड मांस मिट्टी री काया, चमक देख क्यूं चकरावै। कांई भरोसो बोलो सांस रो ॥2॥
बड़ी तपस्या कम खाणो गम खाणो, ओ नमज्याणो हो। मन रे घोडै ने सीखो मोड़नो ॥3 ॥
जागो जागो नींद उड़ावो, शासन मां बतलावै है। अवसर रा बाया मोती नीपजै ।।4 ।।
जैन संघ में हुआ तपस्वी, एक-एक स्यूं मोटा हो। धनजी खंदक ले करल्यो याद थे ।।5।।
(लय-तेजा)