तर्ज : महाप्राण गुरूदेव….
कीर्तन में आप पधारो जी, भैरूंजी महाराज म्हारी विनती थे स्वीकारो जी, भैरूंजी महाराज ।।
थे हो शंकर रा अवतारी, थांनै ध्यावै दुनिया सारी, थे डमरू बजाता आओ जी, भैरूंजी महाराज..
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थांनै स्वान सवारी प्यारी, थांरी महिमा है अति भारी काली का, लाल कुहावो जी, भैरूंजी महाराज…… ।।2।।
मस्तक पर मुकुट बिराजै, हाथां में शस्त्र है साजै थे छम छम, घुंघरू बजाओ जी, भैरूंजी महाराज…… ।।३।।
तोलीयासर धाम है थांरो, मंदिर रो गजब नजारो दुःखियां रा, दुःखड़ा मिटाओ जी, मैरूंजी महाराज..
लाखा नर नारी आवै, बै तेल सिंदूर चढ़ावै, “भक्ता” रो, मान बढ़ावो जी, भैरूंजी महाराज….