Paryushan Parv Aaya,

पर्युषण पर्व आया, इन्तजार करते करते।

 श्रद्धा का रंग लाया, उत्साह भरते भरते ॥
१. अनमोल है यह अवसर, अब धर्म साधना का।
 उड़ जाए मोह निद्रा, नवकार जपते जपते ॥
२. सामायिकें तपस्या, स्वाध्याय लीनता हो।
 आत्मा में हो सरलता, जिनवाणी सुनते सुनते ॥
३. मौसम सुहावना है, हर दिल में जोश जागे। 
निपजाओ धर्म खेती, शुभयोग रखते रखते ॥
(तर्ज : यूं ही कोई मिल गया था)

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