म्है भाव बढावण आया
(तर्जः चैत्य पुरुष जग जाए)
म्है भाव बढावण आया, म्है साता पूछण आया,
तपसण थांरी साता पूछण, दूर दूर स्युं आया । म्है भाव बढावण आया.. 1
१) काम है पुरो टेढो मेढो, विरला हीं कर पावै,
नाम सुन्या हीं गुड गुड बाजे, आंख्या बारै आवै,
ललचाई जिह्वा पर (सृष्टि) आज विजय थे पाया । म्है भाव बढावण आया.
२) तपसण थारी देख के हिम्मत, मन म्हारो हर्षावै, थूथकारो घालै है सगला, काम ने आय सरावै,
मन की चादर धोकर थे तो, उजली कर ली काया । म्है भाव बढावण आया..
३) पारणो करसी जैन विधि स्यूं, मन मानस है बणायो, अनुमोदना करां म्हें तप री, धर्म रो मान बढायो,
साधुवाद मंडल स्युं थानै, देवां खूब बधायां । म्है भाव बढावण आया..