(तर्ज थाली भर कर….)
थाली भरकर ल्यायो चूरमो, ऊपर खीर को बाटको, जीमो म्हारा बालासा, भर ल्यायो पाणी माटको ।।
कारज म्हारा सिद्ध होया जद, सालासर मैं आया जी, भाई बन्धु सगा सम्बन्धी सब नै, सागै ल्याया जी, दूर देश का आया जातरी, आयो बेटो जाट को ।। 1 ।। न्सालासर को पाचक पाणी, सब रोगां ने दूर करे, अटल जोत धूणी की सेवा, पुजारी भरपूर करे, सुबह शाम थांरी होव आरती, देखो उनके ठाट को ।। 2 11
मोहनदासजी की भक्ति से, थे सालासर में आया जी, भक्त जानकर करी किरपा शुद्ध, कर दी बांकी काया जी, तेरस को म्हे उत्सव मनावां, मेलो लागै ठाट को ।। 3 ।।
रामचन्द्रजी का कारज करके, मन में धीरज धारती, सभी पुजारी थारे हाथ जोड़ के, रोज उतारे आरती, भोला सा भगतां स्यू बाबा, अतरो कोई आंतरो ।। 4 ।।
बार बार थांरा दर्शन करके, मन का दुःखड़ा दूर हुया, मिल्या पदारथ मन का चाह्मा पल भर में भरपूर हुया, सवामणी को करयो चूरमो, ऊपर खीर को बाटको ।। 5 ।।
“भक्त मंण्डल” रा बालक बाबा, थांरा ही गुण गावे है, थांरा ही चरणां में बाबा, नित प्रति ध्यान लगावे है, मोठ बाजरो सब न पूरो, भरो दूध को बाटको ।। 6 11