( लय)
रात रुको मैया सवेरे चली जाना -२
अभी हमने जी भर के देखा नहीं है -२
दौड़ी दौड़ी जाऊं मैं सुनार की दुकानपे
अभी हमने टीका मंगाया नहीं है
दौड़ी दौड़ी जाऊं मैं मालन की दुकान पर
अभी हमने गजरा मंगाया नहीं है
दौड़ी दौड़ी जाऊं मैं बजाज की दुकान पर
अभी हमने चुनर मंगाई नहीं है
दौड़ी दौड़ी जाऊं मैं हलवाई की दुकान पर
अभी हमने भोग मंगाया नहीं है
दौड़ी दौड़ी जाऊं मैंया पंडित जी के घर मे
अभी हमने वेद सुनाया नहीं है
दौड़ी दौड़ी जाऊं मैया भक्तों के घर में
अभी हमने भजन सुनाया नहीं है
दौड़ी दौड़ी जाऊं मैं सुहागन के घर में
अभी हमने कंजक जिमाइ नहीं है