(लय-ओ म्हांरा गुरुदेव)
तप रो त्योहार मनावोजी, नस-नस में जोश जगावोजी ॥ स्थायी ॥
जो तपरी ज्योत जलावै, वो अजर अमर बण ज्यावै । थे समता श्रोत बहावो जी, ओ तपस्या रो रंग…. 111 ||
जो लेवै तप रो शरणो, बह ज्यावै अमृत झरणो। निज घर में मौज उड़ावो जी, ओ तपस्या रो रंग….112 ||
सुरपति आ शीष झुकावै, नरपति निज भाग सरावै। माटी रो मोल चुकावो जी, ओ तपस्या रो रंग….||3 ||
तपसी लोगां री आ जोड़ी, करमां री कारा तोड़ी। गण गौरव खूब बढ़ावो जी, ओ तपस्या रो रंग….114 ||
तप आत्म शान्ति रो पथ है, शिवपुर जावण रो रथ है। तपसी बण नाम कमावो जी, ओ तपस्या रो रंग….।।5।।