-: चेतन अब तो चेत :-
(लय : एक तेरा साथ हमको..)
चेतन अब तो चेत।
चेतन अब तो चेत अवसर यूं ही बीत्यो जावै है – २ क्यूँ जीवन व्यर्थ गंमावै है
चेतन अब तो चेत ।
अनन्त काल स्यूँ तूं, भव-भव में भटक रह्यो, रे मूरख अज्ञानी गहरी मूर्छा में, तूं भूल गयो खुद नै, ये कैसी नादानी ?
ओ 555 .कोल्हू रो बण बैल..
कोल्हू रो बण बैल, जाणै कद स्यूं चक्कर खावै है
क्यूं जीवन…… ॥१ ॥
पराधीन पावे, नही सुख सुपणै म भी, तूं देख आ सच्चाई उलझ रहयो है तू, रेशम रे धागे ज्यूं, उलझणों दुःख दायी
दृष्टा बण तूं देख
दृष्टा बण तूं देख, आगम-वाणी पथ दिखलावै है
क्यूं जीवन..
॥२ ॥
नूर तन हीरे ने, तरसै है पावण ने, से सुर-नर-सज्ञानी लेवे इण रो सार, हो जावै भव स्यूं पार, रुलै है अज्ञानी सांसा री आ डोर…….
सांसा री आ डोर पल-पल घटती ही जावै है
क्यूं जीवन…
.. ॥३॥
थारी आ करुणा, मैत्री रो मंत्र बण्या, कलुषता धुल जासी समता संयम री, सुरभि स्यू कर्मा री, नींवड़ली हिल जासी पुण्यारी री भोर
पुण्यारी री भोर, पुरुषार्थ री गाथा गावै है क्यूं जीवन….