Chetan Chidanand Charna Me

चेतन ! चिदानन्द चरणां

 तर्ज : वृन्दावन का कृष्ण कन्हैया….

 रचयिता : आचार्यश्री तुलसी

चेतन ! चिदानन्द चरणां में, सब कुछ अरपण कर थांरो,
 सफल बणां तूं सत-संगत में, मूंघा मोलो मिनख जमारो ।। 
खाली हाथां आयो है तूं, जासी खाली हाथां रे,
 लारै रहसी इण दुनिया में, जस अपजस री बातां रे,
 थोड़े जीणे रे खातिर क्यूं, बाँधे सिर पापां रो भारो ।। १ ।। 
कोड्या, साटे अहल हार मत, ओ हीरो लाखीणो रे,
 विष मत घोल वासना रो, जो शांत सुधा रस पीणो रे, 
अति झीणो परमारथ रो पथ, तूं है नश्वर तन स्यूं न्यारो ।। २ 
भryo अनन्त अखूट खजानो, गाफिल !थारे घर में रे, 
क्यू न निहारै बारै-बारै , क्यू भटकै दर-दर में रे, 
आग छिपी अरणी में ढूंढे, काठ काट मूरख कठिहारो ।। ३ ।।
 एक नयो पैसो भी थांरै, नहीं चालसी सागै रे, 
करया आपरा कर्मा स्यूं ही, सुख-दुःख मिलसी आगै रे,
 संजम रे मारग पर चाल्यां, “तुलसी” निश्चित है निस्तारो ।।४ ।।

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