(लय : धर्म की जय हो)
श्रद्धा विनय समेत, णमो अरहंताणं ।
प्रांजल-प्रणत-सचेत, णमो अरहन्ताणं ॥ ध्रुव ॥
आध्यात्मिक-पथ केअधिनेता।
वीतराग प्रभु विश्व विजेता।
शरच्चन्द्र सम श्वेत, णमो अरहन्ताणं ॥ ध्रुव ॥१ ॥
अक्षय, अरुज अनन्त अचल जो।
अटल, अरूप-स्वरूप जो,
अजरामर अद्वैत, णमो श्री सिद्धाणं ॥ ध्रुव ॥ २ ॥ ।
धर्म-संघ के जो संवाहक । ,
निर्मल धर्म नीति निर्वाहक।
शासन में समवेत, णमो आयरियाणं ॥ ध्रुव ॥३ ॥
आगम अध्यापन मेंअधिकृत
विमल कमल सम जीवन अविकृत।
शम संयम समुपेत, णमो उवज्झायाणं ॥ ध्रुव ॥४॥
आत्म विषय साधना लीन अनवरत,
विषय वासनाओं से उपरत।
‘तुलसी’ है अनिकेत णमो लोए सव्व साहूणं ॥५॥