Mahima Aparmpar Hai

श्री हनुमान आराधना

(तर्ज – जिया बेकरार है…)
महिमा अपरंपार है, ये सच्चा दरबार है,
 माँ अंजनी के लाल लाडले, तेरी जय जयकार है।।
लाल लंगोटा लाल ध्वजा, तन, लाल सिन्दूर सुहाये हो, मुख में नागर पान लाल तेरी, महिमा वरणी न जाये हो, कंचन सा आकार है, कुंडल का श्रृंगार है।।
गदा हाथ में लेकर के तुम, बजरंगी कहलाए हो, 
संतो की तुम सेवा करते, रामभक्त कहलाए हो, 
भुजबल का नहीं पार है, तूं शिवशंकर अवतार है।।
सीयाराम के काम किए यश, तीन लोक में छाया है, संकट मोचक नाम पड़ा तूने, सब का कष्ट मिटाया है, भक्त खड़े तेरे द्वार हैं, तेरा ही आधार है।।

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