मन्दिर मस्जिद गिरजाघर
(लय : खड़ी नीम के नीचे)
मन्दिर मस्जिद गिरजाघर में बांट दिया भगवान को,
धरती बांटी, सागर बांटे, मत बांटो इन्सान को ॥ ध्रुव ॥
अभी यह राह तो शुरू हुई है लेकिन मन्जिल दूर है, उजियाला महलों में बंदी, हर दीपक मजबूर है।
मिला न सूरज का संदेशा, मत रोको प्रस्थान को ॥१॥
धरती बांटी..
धर्म नाम पर बनी दीवारें दिल से दिल ना साध सके, जाति पंथ की सीमाओं में उसका रूप न बांट सके ।
ऊंच नीच का भेद मिटा, पाये घट-घट भगवान को ॥२॥
धरती बांटी……
मैं गरीब हूं तूं अमीर यह लघु विराट की खाई है,
स्वार्थों का सौदा कर हमने अपनी धाक जमाई है।
ना कुछ मेरा ना कुछ तेरा, पाएं इस वरदान को ॥३॥
धरती बांटी……….
दिया गया विश्वास ये छूटे मन की गांठें न खुले,
गिरतों की वैशाखी बन कर दीये से दीया जले।
मंजिल एक हमारी सबकी, सफल करें अभियान को ॥४॥