पालणो
आपा चालो ए सैया मथुरा जी शहर, मथुरा जी शहर सुवावणो ।
राणी देवल दे र जायो लाडण पुत, वसुदेव जी र घरा रे बधावणो ।
म्हार खाती क न उरो रे बुलाय, सखरो घड़ ल्यायी रे रुड़ो पालणो ।
पालणा र आया पाया रतन जड़ाय, ईस डुलाय द्यो जी जाजा हिंगलु ।
पलगा र पाटु सुतु वेज वणाय, दावण द्यौ मखतुलड़ी ।
पलणो टाग्यो टाग्यो जल जमना री तीर, सुधरा बाई द्यो हुलरावणो ।
बाई म्हारी हालरीया रो झालरीयो घड़ाय, चूड़लो चीराय द्यां जी हंसती दांत रो ।
बीरा, म्हारा चूड़लो म्हारी भावज न पेराय, म्हान ओढ़ाय यो जी बोरंग चुनड़ी ।
आपां चालो ए सैया विराटनगर शहर, विराटनगर शहर सुहावणी । राणी रमेशदे र जायो लाड़ण पूत, सीतारामजी र घरां रे बधावणो ।
म्हार खातीक न उरो र बुलाय, सखरो घड़ ल्यायी रे रुड़ो पालणो ।
पालणा र आया पाया रतन जड़ाय, ईस ढुलाय योजी जाजा हिंगलु ।
पालणा र पाटु सुतु वेज वणाय, दावण द्यो मखतुलड़ी ।
पलणो टांग्यो टांग्यो सामलोड़ी साल, भुवा बाई द्यो हुलरावणो ।
बाई म्हारी हालरीया रो झालरीयो घड़ाय, चूड़लो चीराय द्यां जी हंसती दात रो ।
बीरा म्हारा चूड़लो म्हारी भावज न पेराय, म्हान ओढ़ाय योजी बोरंग चूनड़ी ।
बाई म्हारी ओढ़ पेर थार घरा न सिधाय, वंश बधावजी म्हारी कुल बहु ।
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