Sasuji Ne Nayi Binani, Ud Ud Re, &Barah Mas Ka Geet

1

सासू‌जी न नई बीनणी, जबरा नाच नचावै ओ कलयुग साफ सुनावै 
हवा लागने स्यू पश्चिम री, दुनीर्या पलटी खावै ओ कलयुग…
सासु एक सुना*व जद बा पाछा पांच सुनावै 
थारा खारा ए फटकारा, म्हाने नहीं सुनावै
 सासुजी न मोटी मोटी आख्या लाल दिखावै … ओ कलयुग घणा करोला बड्बड़ाटा, 
म्हे हो ज्यास्यां न्यारा टीकट कटास्यां इस घर स्यूं थे 
बैठा गीणज्यो तारा 
भोली भाली सासु ऊपर, जबरा रोब जमाव … ओकलयुग 
सासुजी तो कर पीसनो, बहू जबरी मौज उडावै 
फोरेन और सीफोन की बहु न नित नई साड्या चावे सासुजी तो कर रसोई बहु सीनेमा जाब … ओ कलयुग रुखी सुखी रोटी खाकर, सासु तो सो जाव 
मगर बीनणी बड़ी चटकोरी, ताजा माल उडावै
 इडली, डोसा खाया बिना नीद बीन नहीं आव 
सासु तो अब बहू बनी है, बहू सास कहलावे सारा घर पर हूक्म चलावे सेठानी बण जावे 
दुनीयाँ तो या कलयूग रा, हाल देख चकराव 
सासुजी न नई बिनणी । हवा लागनस्यू ़़
***
2
बार मास को गीत
बन्ना हंसती थे बल ल्याय रेल में बैठांला
 रेलां रा टूट्या तार, आगरो देखांला 
बम्बई है बड़ो भारी शहर, चौपाटी घुमांला 
कलकत्तो बड़ो भारी शहर, काली जी धोखांला
 मिंगसर में मांग भराय, सासर जावाला
 पौ महीना म आव रविवार, अलुणो जीमाला
 मा महीना मं पड रही ठंड, क सीरखां ओढ़ांला 
फागण में उड रे गुलाल, क होली खेलांला 
चैत महीनम आई गणगौर, सहेल्यां संग पुजांला
 वैशाख में आई आखा तीज, खिचड़ो जीमांला 
जेठ महीन मं जीठाण्या रो साथ, क झगड़ो भेलांला आषाढा म पड़ रयो मेह, पपैया बोलेला 
सावण म आई छोटी तीज, क झुला झुलांला 
भादव म आई बड़ी तीज, क सातु पासांला 
आसोजा में लग रही आस, बनासा घर आवला
 कार्तीक में कंथ मिलाय, दिवाली धोखांला ।
 ए गीण लिया बार मास बनासा घर आवाला ।
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3
उड उड रे म्हारा काला रे कागला, जद म्हारा बनासा घर आसी २
एकर उडकर सुगन मनाऊ २ सोन में चांच मढाऊं कागा जद म्हारा बनासा …
खीर खांड का भोजन जीमाऊ सोन में चांच मढाऊ कागा जद म्हारा बनासा घर आसी
पगल्या में थार बाँधुरे घुघरा, चांदीरा पांख लगाऊं कागा, जद म्हारा…
 आंगलीयों म थांर अंगुठी करावु, गला में हार पैरावं कागा, जद म्हारा…बनासा घर आसी जद

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