Abhivandana Tumhari Sativar Bhale Padhare

(लय- आये हो मेरी ज़िन्दगी में तुम बहार बनके )

अभिवन्दना तुम्हारी सतिवर भले पधारे,
 लाए है साथ ज्योति-२, और धर्म की बहारे
मंगल प्रभात आया  स्वागत में गुनगुनाए
 तुम त्याग की हो मूरत, यह सौम्यता सुहाए 
भक्ति का थाल लेकर, हम आरती उत्तारे
 पुलकित धरा गगन है, हम आप‌को बधाएं -2 
अभिनव उमंग छाई चरणों मे सर झुकाए 
सपनों की रोशनी में सतिवर तुम्हे निहारे
③ पावस तुम्हारा पाया, गुरुवर कृपा है भारी 
हंसते हैं आज चेहरे खिल्‌ती हैक्यारी  क्यारी  
 मन में अजीब हलचल, ये देखके नजारें
④ दिल्ली के श्रावकों की श्रद्धा सदा निराली 
गुरु चरण में समपर्ण हर पल रहे खुशाली,
 सार्थक सदा करें हम महाश्रमण के इशारे (
( लय -आओबच्चो तुम्हे दिखाएं) बच्चों केलिये
गुरु वर को पा महानगरी मे धरा का कण महक रहा 
एक स्वर से एकलय से नन्हों का मन चहक रहा
गुरुवर स्वागतम् 
④ आराध्य तुम्हारे दर्शन करके दशों दिशाएं हर्षित है चरणशरण को पाकर तेरी जन -२ का मन पुलकित है जहाँ भी देखा आज हमने हर मानस समर्पित है
 श्रद्धाके स्वरो का सरगम चहुं दिशा में गुंजित है 

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