(लय- आत्मसाक्षात्कार प्रेक्षाध्यान के द्वारा)
अक्षय तृतीया का सुपावन पर्व आ गया
देरहा-2 संदेश तप का हर्ष छागया
प्रथम तीर्थंकर ऋषभगवान मुनि बनकर
आहार पानी के लिये वे घूमते घर-घर।।
सुपौत्र श्रेयांस सारा राज पागया
मात्र भिक्षा ग्रहण करना चाहते बाबा
लोग देते जो नहीं वो चाहते बाबा
देह दुर्बल 2 बदन पर तप तेजछा गया
③ राजपथ पर चल रहे प्रभु नजर में आए..
महल से श्रेंयास उतरा भावना भाऐं
प्रभु पधारे महल में आनन्द छागया
पारणा प्रभुका हुआ था इक्षु रस का दान
धन्य बेला पल सुमंगल, हर्ष है असमान ।।
दानकी-2 महिमा बढी उल्लास छा गया