Har Manas Harsh Vibhor

(तर्ज -नखरालो देवरियो)
हर मानस हर्ष  विभोर ,मंगल दीप जल्या ।
 आ उजली आई भोर खुशी रा सुमन खिल्या न  वन सो प्यारो भैसव सासण है आपारो 
नई-नवेली रचना  लागे  जग में तेज सितारों 
गुरु र हाथा में डोर…
एक-2 स्स्यू हुया दीपता आपा रा गणमाली। 
मिल्यो सुखद नेतृत्व संघ न ओ गण गौरवशाली
 प्रीति ज्यू चंद चकोर
महाश्रमण री प्रज्ञा मानवजाति रो वरदान 
युग-र रहसी आभारी गुरु भिक्षु रोअवदान
 महिमा प्रसरी सब ओर
 तेजस्विता गुरु री सारो संघ आज   खुशहाल 
शासन री मर्यादा अनुशासन रो काम कमाल
 चमके तेरापंथ तार ।।
श्रद्धा स्यू दिल दरियो भरियो अपणो भाग्य आज सरावा ईण शुभ अवसर  पर म्हे मंगल गाकर आज बधावा 
नाचे सारा मन मोर

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