(लय – ऐ मेरे वतन के लोगो)
जय जीवन दाता गुरुबर जय श्रमण संघ सेनानी । जय जय जय जय ज्योतिरधर जय महापुरुष अवदानी ।।
① युग बोध हुआ धुंधला सा स्वार्थो के घन मंडराए। संवेदन नयन मुंदे जब तुम दिनमणि बनकर आए।
युग-२तक अमर रहेगी, पौरुष की अमर कहानी ।।
② जब व्यथित बनी मानवता, छोड़ा मानव ने सत्यपथ दयनीय दशा मूल्यों की, खो गए शून्य में इति भय ।।
तब तुमने आगे आकर, खोली राहे अनजानी ॥
③ तुम रचते ही जाओ गे, दुनिया, सपनो की हरदम
यह सोच थम गई सहसा, झटके से.टूट गया क्रम
वह रूप विराट कहाँ अब, वह कहां कृपा कल्याणी ॥