लाखों महफिल जहां मे गुरु वर ( यूं तो) तेरि महफिल सी महफिल नहीं है-2
स्वर्ग सम्राट हो या हो-चाकर, तेरे दर पे है दरजा बराबर तेरी हस्ती को है जिसनेजाना कोई आलम नया फिर नहीं है
दरबदर खाके ठोकर जो थककर
आगया गर कोई तेरे दर पर
तूने नजरोसे रस जो पिलाया
वो बताने के काबिल नहीं है
जीते मरते जो तेरे लगन में
जलते रहते विरह की अगन में
भरोसा -२ तेरा हे मुरारी तू दयालु है कातिल नहीं है (मेरे गुरुवर तू जहाँ मेरी मंजिल वंही है)
तेरे रस का लगा चसका जिसको
लगता वेकुण्ठ फीका सा उसको
डूबकर कोई बाहर ना आया
इसमें भंवरे है शाहिर नहींहै