(लय- होठो ले छूलो)
मां सरस्वती मुझ पर तुम इतनी कृपा करदो
मां सरस्वती मुझ पर तुम इतनी कृपा करदो
मेरा गीत बने सुन्दर, मुझको ऐसा वर दो
तेरे चरणो के सिवा माँ मै कहा जाऊ
तेरी जो कृपा हो माँ, मैं मीठे भजन गाऊं
जीवों को सुर देंकर, गीतों को अमर कर दो
में निपट गंवार हूँ मा, मूरख महा अज्ञानी
तेरी जो कृपा हो माँ, मूरखभी बने ज्ञानी,
चरणों में जगह देकर जीवन को सफल कर दो
हृदय में, विराजों तुम वाणी में समा जाओ
सुर की करे साधना मां अब तो तुम आजाओ
सुर सरिता के रस में, गीतो को सरस कर दो