प्रातः क़ालीन वंदना
जीवन-धन तुम जीवन-दाता,
कलाकार जीवन-र्निमाता।
श्रमण संस्कृति के उद्गाता, करणानात के हो तुम आबाला करूण तपस्वी, बीर्थ मरुस्थी,
ओजस्वी प्रभु परम यशस्वी, दिनमणि के अतिशय सेकस्यी
विघ्न विनायक मंगल दायक, शांति विधायक जग उन्नायक
युग-युग जीओ शासन नायक विश्व शांति के तुम संगायक
(तर्ज चौपाई)
सायंकालीन वंदना
युग प्रणेता, युग प्रचेता, युग पुरुष लो वंदना
विनयनत बद्धांजलि हम, कर रहे अभिवंदना
धन्य है सौभाग्य तुम से, कुशल अनुशास्ता मिले
दिव्य जीवन पा तुम्ही से. भव्य शतदल है खिले
जीओ युग- युग धर्म शासक,जय विजय पग पग वरो तुम्ही नैया के खैवेया पार भव जल से करो