(लय- कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं)
माता पिता और गुरु
मिलते सौभाग्य से माता पिता और गुरु उनके उपकार को तुमभुलाना नही
भाव सेवाका मन में भावित रहे उनके दिल को कभी भी दुखाना नहीं
① जन्मदाता है वो पालन पोषण करें ज्ञान देकर जीवन सवारे सदा
मान अभिमान वश उनका अपमान कर बूढी आंखों से आंसू बहाना नही
केवल लेनाही लेना नहीं ठीक है लेकर लौटाने की मन मे हो भावना
सिर्फ स्वारथ में माँ बाप को भूलकर कर्ज अगले जन्म में
लेजाना नहीं