Bhikshu Swam Jyotirdham

भिक्षु स्वाम ज्योतिर्धाम 

(लयः जय हनुमान अति बलवान)

रचयिता- साध्वी कनक श्रीजी

भिक्षु स्वाम, ज्योतिर्धाम पावन नाम, दीपानंदन ! 
म्हारै तो थांरो ही आसरो, हे सब दुःख भंजन ! 
म्हारै तो थांरो ही आसरो । थांरो ही आसरो, सदा सुखवास रो ।।
१. बाबो है भक्त वत्सल, भगतां नै तारै,
 सारै है काम सब रा, दुःखड़ा निवारै ।
 जय महासंत ! भिक्षु भदंत ! शक्ति अनंत ।।
२. श्रावक शोभजी जद, सिंवरया हा जेल में, 
करतां ही दरसण बेड्या, टूटी खेल-खेल में । 
बढ्यो प्रभाव, चमक्यो नांव, उमड्या गांव ।।
३. अंधेरी ओरी साक्षी, थारै समय री,
 गावै है गाथा मैत्री, अहिंसा, अभय री ।
 नमग्या देव, पदरज सेव, करै सदैव ॥
४. ॐ भिक्षु मंत्र में है, चमत्कार भारी,
 जय भिक्षु मंत्र में है, चमत्कार भारी । 
भिक्षु समाधि-स्थल है, सिद्ध सिरियारी । 
लाखां लोग पा आलोक, बणै अशोक ॥
५. म्हांरै तो पल-पल छिन-छिन, स्वामीजी री ध्यावना, ‘कनक’ दिखाद्यो मूरत, फलै मन भावना । 
करो निहाल, कृपा विशाल, गण प्रतिपाल ।।

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