Bhikshu Hai Imarat Ro Jharno

भिक्षु है इमरत रो झरणो  

(लय : धर्म की लौ जलाएं)

रचयिता : साध्वी फूलकुमारीजी

भिक्षु है इमरत रो झरणो । 
जनम मरण री पीर निवारण, है साचो शरणो ।।
१. सुमिरण करयां कटै संकट, दुःख गल्या लारली जावै, काळी काळी राता में भी, स्वतः उजासो आवै । 
पितवाणी पूरी करली अब, और न कुछ करणो ।।
२. पल-पल पग-पग पर रखवाळो, प्राण पियारो म्हारो, एक शब्द में कहूं अगर, गिरतां रो सबल सहारो ।
 बणग्यो जिण रै प्राण देव, बीं-रो निश्चित तिरणो ।।
३. मीरां रै घनश्याम राम है, ज्यूं प्रभु भिक्षु म्हारै
, रोम-रोम नस-नस में बसिया, अब म्है किण रै सारै । 
चाहै आवै तूफानी अंधड़ भी नहीं डरणो ।।

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