(लय- माय नी माय मुंडेर )
पूज्य वरों के श्री चरणों में (ज्ञानशाला दिल्ली की प्रशिक्षिकाओं द्वारा प्रस्तुत गीत – साध्वी जी कनकश्रीजी)
ज्योति पुंज की ज्योति रश्मियां प्रज्ञा ज्योति जगाए। महाबोधि मंदार आर्य की अभिनव श्री सुषमाएं ।।
वंदन वंदन शत-२ वंदन । भरदों जीवन में नव स्पंदन ।।
① मौसम कितना आज सुहाना महके मन वृंदावन । पौर-२ पुलकित है पाकर पूज्यवरों के दर्शन ।।
कुशल क्षेम पूछे श्रद्धा से,मंगल गीत सुनाये11
गुरु करुणा से मुनिश्री, साध्वी श्री ने हमें जगाया
जगह-जगह शालाए संचालित हो लक्ष्य बनाया
पूज्य प्रवर के सपनों को आकार नया दे पाए
हरा भरा यह बाग रहे आये पाने ऊरजाएं
राजधानी दिल्ली की से समवेत ज्ञानशालाएं
ज्ञानदीप उजला ले संस्कारों की लिखे ऋचायें
रहे समर्पित गण सेवा में वर मांगे प्रशिक्षिकाएं