Jara Itna Batade Kanha

।। श्री श्याम वन्दना ।। 

जरा इतना बतादे कान्हा, तेरा रंग काला क्यूँ, 
तू काला होकर भी, जग से निराला क्यूँ ।। टेर ।।

मैंने काली रात में, जन्म लिया,
और काली गाय, का दुध पिया,
वो ! रात अँधेरी काली, इसीलिये काला हूँ ।।१।।
सावन में बिजली, कड़कती है, 
और बादल, खूब बरसते है,
 क्योंकि बादल का रंग काला, इसीलिये काला हूँ ।।२।।
सखी नयनों में कजरा लगाती हो, 
और पलकों में मुझको बिठाती हो, 
तेरे काजल का रंग काला, इसीलिये काला हूँ ।।३।।
मैंने काले नाग, को नाथ लिया, 
और कालिये के फन, पर नाच किया,
 उन नागों का रंग काला, इसीलिये काला हूँ ।।४।।
सखी घर में रोज बुलाती हो, 
और माखन खूब खिलाती हो,
क्योंकि सखियों का दिल काला, इसीलिये काला हूँ ।।५।।

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