(लय -धर्म की लौ जलाये हम)
मिलेगा हमको प्रभुका द्वार -2
प्रभु का द्वार मिलेगा यदि जुड़ेंगे दिल से तार
①. माला के मनको पर यद्यपि, जाप सदा करते हैं।
पर अन्दर की अस्थिरता से इधर उधर फिरते हैं।
सब कुछ खोकर भी पाने का रहता एक विचार।
② जनम अनन्ती बार लिया हमने इस भवसागर में
कोई रतन न आया अबतक इस मन कें गागर में
जागेगा अन्तर मानस तब ही होगा निस्तार
③ सही करे पहचान स्वयं की दर्शन् ज्ञान चरण से नहीं प्रभावित हो यह मून बाहर के आकर्षण से
आवश्यक है ऐसा है कोई मंगल मय आधार