(तर्ज : खड़ी नीम के नीचे)
महाप्रज्ञ गुरुवर जीवन श्रृंगार है। आज समर्पित श्री चरणो में भक्ति भरा उपहार है।
१. जन्मोत्सव की मंगल घड़ियां खुशियां छाई कण कण में। दशों दिशाएं पुलकित आई नई चेतना जन जन में। श्रद्धा से श्रद्धा से, झंकृत वीणा के तार हैं ॥
२. एक-एक पर गुरुवर ने वात्सल्य भाव है बरसाया। तृप्त हुई है लाखों आंखें पा करके शीतल छाया। नई प्रेरणा नई प्रेरणा, मिली, मिले हरबार है ॥
३. गुरु इंगित पर संघ समूचा निष्ठा से बढ़ता जाए। गगन धरा पर भैक्षव शासन की सौरभ हम महकाएं। तेरी शुभ तेरी शुभ नजरों में सुख संसार है ॥