(तर्ज- ज़िन्दगी प्यार का गीत है जिसे हर)
हे प्रभु ज्ञान का दान दो, हम सभी की यही वन्दना है
दूर दुर्गम सभी तुम करो हम सभी की यही अर्चना है
धर्म रक्षा में हम प्राण दे प् ना अधरमी कभी हम बने
झूठे वैभव को हम त्यागकर ,सर्वदा सत्य वादी बने
नाकभी हम को अभिमान हो बस यही एक आराधना है।
सत्यवादी रहे हम सदा ओर सदाचार हो सम्पदा झूठ
ना जगे मन् में हिंसा कभी प्रीतकी ही बहे नरवदा
छल कपट से रहे दूर हम मिलके करते यही कामना
लाख बाधाए आएतो क्या मोह भरमाए हमको तो क्या जिसे को मिले तेरी शरण से धैर्य छूटेगा उसका कहां
हम सभी को तो तुमसे प्रभु वही वरदान तो मांगना
है