(लय- आ चल के तुझे मैं दिखलाऊं)
अनुमोदना, अनुमोदना अनुमोदना बारम्बार।
तपस्या को है, तपसी को है। वंदन है बारम्बार ।
विषयों से भरा, संसार पूरा आसान नही है यहां।
मन वश मे रहे, कुछ भी न कहे, दुष्कर है ये काम बङा ।।1।।
तप जीत गया, मन हार गया। संयम का ये सत्कार। आसान नही, तप का ये सफर वंदन है बारम्बार ।।2।।
तप सरल नही, मुश्किल है बङा, विरले ही कर पाते। चलते है बहुत, रुकतें है बहुत, विरले ही सह पाते।।3।।
जो सहते हैं, वो रहते हैं, मंजिल भी वो ही है पाते। संकल्प भी हो, संयम भी हो, वो ही तप कर पाते।।4।।
तुमने जीता, खुद से खुद को है बहुत कठिन ये डगर, मंगलमय हो, सुखकारी हो आत्मा के रमण का ये सफर ।।5।।